सनातन का अर्थशास्त्र: संस्कृति से निवेश तक उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर

“सनातन थीम पर आधारित टाउनशिप बनाएं” — रवींद्र जायसवाल

मुंबई। क्या संस्कृति और आस्था केवल सामाजिक पहचान का विषय हैं, या वे आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकती हैं? मुंबई में आयोजित “उत्तर प्रदेश में सनातन का अर्थशास्त्र” कार्यक्रम में यह सवाल एक नए आर्थिक नजरिए के साथ सामने आया। उत्तर प्रदेश के स्टांप एवं पंजीकरण तथा न्याय शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने रियल एस्टेट निवेशकों से सनातन थीम पर आधारित टाउनशिप विकसित करने की संभावनाओं पर विचार करने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम (UPDF) की ओर से मुंबई के सहारा स्टार होटल में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से पारंपरिक मूल्यों और सस्टेनेबिलिटी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में ऐसी आवासीय परियोजनाओं की संभावनाएं तलाशने की जरूरत है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ समान सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों वाले लोग एक समुदाय के रूप में रह सकें।

जायसवाल ने निवेशकों से सीनियर-सिटिजन लिविंग प्रोजेक्ट्स में भी निवेश की संभावनाएं तलाशने को कहा। बदलती पारिवारिक संरचना और महानगरों की भागदौड़ के बीच वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सामुदायिक जीवन वाले आवास एक उभरता हुआ बाजार बन सकते हैं।

संस्कृति और रियल एस्टेट का नया मेल

सनातन थीम पर आधारित टाउनशिप का विचार केवल धार्मिक परिसर बनाने तक सीमित नहीं है। इसके तहत आधुनिक आवास के साथ मंदिर या आध्यात्मिक केंद्र, योग-ध्यान, आयुर्वेद और वेलनेस सुविधाएं, सामुदायिक केंद्र, भारतीय कला-संस्कृति के लिए स्थान और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचा विकसित किया जा सकता है।

ऐसे प्रोजेक्ट खास तौर पर उन परिवारों को आकर्षित कर सकते हैं जो आधुनिक जीवन की सुविधाओं के साथ सांस्कृतिक वातावरण चाहते हैं। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक शहर इस मॉडल के लिए संभावित केंद्र बन सकते हैं।

वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा और वृंदावन जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन के साथ हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, वेलनेस और स्थानीय कारोबार के अवसर पहले से मौजूद हैं। यदि इन्हें बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए तो संस्कृति एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम का आधार बन सकती है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए नया बाजार

जायसवाल का सीनियर-सिटिजन लिविंग पर जोर भी इस आर्थिक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के बड़े शहरों में संपत्ति की बढ़ती लागत और बदलती पारिवारिक संरचना के बीच रिटायरमेंट के बाद शांत और सुरक्षित जीवन की तलाश बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहरों में आध्यात्मिक वातावरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा, सामुदायिक गतिविधियों और आधुनिक आवास को जोड़कर वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे प्रवासी उत्तर प्रदेशियों के लिए भी अपने राज्य में निवेश और भविष्य का आवास तैयार करने का विकल्प बन सकता है।

निवेश के लिए कानून-व्यवस्था और संपत्ति सुधार

कार्यक्रम में रवींद्र जायसवाल ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और स्टांप एवं पंजीकरण विभाग में किए गए सुधारों को भी निवेश माहौल से जोड़ा।

उन्होंने कहा कि करीबी रिश्तेदारों के बीच समझौतों और किरायेदारी से संबंधित समझौतों पर स्टांप शुल्क कम करने तथा शुल्क के युक्तिकरण से संपत्ति के हिस्सों के समय पर हस्तांतरण में सुविधा हुई है और संपत्ति विवादों में कमी आई है।

उन्होंने पंजीकरण व्यवस्था में स्वामित्व अधिकारों के सत्यापन पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, कुछ स्टांप शुल्कों में कमी और युक्तिकरण के बावजूद योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में स्टांप से संबंधित राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

रियल एस्टेट निवेशकों के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि जमीन की कीमत के अलावा स्वामित्व की स्पष्टता, दस्तावेजों की विश्वसनीयता और पंजीकरण प्रक्रिया निवेश के जोखिम को प्रभावित करती है।

महाकुंभ: आस्था से अर्थव्यवस्था तक

कार्यक्रम के संयोजक और UPDF अध्यक्ष पंकज जायसवाल ने “सनातन अर्थशास्त्र” की अवधारणा को उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल से जोड़ते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य के मूल सांस्कृतिक चरित्र के अनुरूप विकास की दिशा तैयार की गई है।

उन्होंने महाकुंभ को इसका प्रमुख उदाहरण बताया। उनके अनुसार, महाकुंभ को केवल धार्मिक आयोजन न मानकर पर्यटन, परिवहन, होटल, हॉस्पिटैलिटी, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया गया।

यही वह बिंदु है जहां “सनातन का अर्थशास्त्र” एक व्यापक अवधारणा बनता है। धार्मिक आयोजन अपने साथ परिवहन, होटल, भोजन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, डिजिटल भुगतान और अनेक सेवा क्षेत्रों को जोड़ते हैं। इस लिहाज से आस्था आधारित पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बाजार पैदा कर सकता है।

पंकज जायसवाल ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर सनातन पर्यटन के गंतव्य के रूप में विकसित होने की संभावनाओं की भी बात कही।

प्रवासी समुदाय बने निवेश का पुल

मुंबई में आयोजित कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य प्रवासी उत्तर प्रदेशियों को राज्य की आर्थिक संभावनाओं से जोड़ना भी रहा। इन्वेस्ट यूपी मुंबई चैप्टर के महाप्रबंधक रतीश नायर और उप महाप्रबंधक उज्ज्वल सैनी ने संभावित निवेशकों के साथ संवाद किया और उत्तर प्रदेश में निवेश के अवसरों तथा सरकारी सहयोग की जानकारी दी।

कार्यक्रम में चित्रसेन सिंह ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित अपने प्रोजेक्ट और राज्य सरकार से संभावित सहयोग पर चर्चा की।

इस तरह के संवाद का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मुंबई जैसे वित्तीय और कारोबारी केंद्र में उत्तर प्रदेश मूल के बड़े कारोबारी और निवेशक मौजूद हैं। राज्य के लिए यह पूंजी, विशेषज्ञता और कारोबारी नेटवर्क को वापस उत्तर प्रदेश से जोड़ने का अवसर है।

सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली तथा 3,500 से अधिक श्रद्धालुओं के लिए काशी की मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने वाले शुभ्रांशु दीक्षित को सम्मानित किया गया। दीक्षित ने मुंबई से काशी तक 11,000 लोगों के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई।

कार्यक्रम में BVG ग्रुप के प्रशांत, पृथ्वी ग्रुप के जनार्दन यादव, कोरियाई उद्योग सलाहकार अमित नारायण, टेकस्किल के राजन मत्ता, अमेरिका स्थित इवॉक्स के चेयरमैन अरविंद शर्मा, संडाइन के संदीप और इन्वेस्टमेंट बैंकर अखंड सिंह समेत कई कारोबारी और निवेशक मौजूद रहे।

आगे की राह

“सनातन का अर्थशास्त्र” की अवधारणा अभी एक विचार और विकास-विमर्श के रूप में सामने आई है। इसकी वास्तविक आर्थिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि संस्कृति और आस्था को कितनी प्रभावी ढंग से पर्यटन, रियल एस्टेट, वरिष्ठ नागरिक आवास, वेलनेस, रोजगार और स्थानीय कारोबार से जोड़ा जाता है।

रवींद्र जायसवाल का सनातन थीम वाली टाउनशिप का सुझाव इसी दिशा में एक नई संभावना खोलता है। यदि आधुनिक सुविधाओं, पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक व्यवहार्यता के साथ सांस्कृतिक पहचान को जोड़ा जाता है, तो उत्तर प्रदेश में एक अलग तरह का कम्युनिटी-लिविंग और निवेश मॉडल विकसित हो सकता है।

यही “सनातन के अर्थशास्त्र” की सबसे बड़ी संभावना है—आस्था को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन, निवेश, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में देखना।