हमारे बाद महफ़िल में अफ़साने बयाँ होंगे…
“हमारे बाद महफ़िल में अफ़साने बयाँ होंगे, बहारें हमको ढूँढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे…” कभी फिल्मों का एक संवाद लगता था यह। आज नाना पाटेकर की याद में यही पंक्तियां जिंदगी का सबसे गहरा सच बनकर सामने खड़ी हैं। इंसान चला जाता है, लेकिन क्या वह सचमुच चला जाता है? क्या उसके जाने के…
